ब्यूरो चीफ: – कपिल मिश्रा
भागलपुर/पटना: आईटीबीपी (ITBP) के डिप्टी कमांडेंट आयुष दीपक की आत्महत्या के मामले में उनके परिजनों ने न्याय के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का दरवाजा खटखटाया है। परिजनों ने ललमटिया थाने के पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस की ज्यादती और प्रताड़ना के कारण ही डिप्टी कमांडेंट आयुष दीपक को आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा।
परिजनों के मुख्य आरोप
ITBP डिप्टी कमांडेंट आयुष दीपक की मां राधा देवी और बहन रजनी भारती एवं ज्योति भारती द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप निम्नलिखित हैं:
बहन को अर्धनग्न कर थाने ले जाने का आरोप: परिजनों का आरोप है कि ललमटिया पुलिस थाने के कर्मचारियों ने आयुष दीपक की बहन ज्योति भारती को घर से घसीटते हुए, कपड़े फाड़कर सरेआम सड़क से पैदल थाने ले गए।
झूठे मुकदमे और प्रताड़ना: उनका कहना है कि पुलिस ने बेवजह खींचकर ले जाने के बाद उनकी बहन पर कई झूठी धाराएं लगाईं, उन्हें जातिसूचक गालियाँ दी गईं और अंततः उन्हें बेवजह जेल में बंद कर दिया गया।
उच्च अधिकारियों की अनदेखी: मृतक के पिता स्वयं एएसपी (ASP) पद से रिटायर्ड हैं, इसके बावजूद उनकी शिकायत पर उच्च अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की।
सुसाइड नोट में जिक्र: डिप्टी कमांडेंट आयुष दीपक ने आत्महत्या से पहले लिखे अपने सुसाइड नोट में ललमटिया थानेदार का जिक्र किया, जिनकी कार्रवाई से बहन की इज्जत गई और उन्हें फंसाया गया।
मृत्यु के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मी: परिजनों ने ललमटिया थानेदार राजीव रंजन, राजकुमार, डीएसपी राकेश कुमार, नियाज आलम मुंशी, नेहा कुमारी और मुंशी विवेक कुमार पर सोची-समझी साजिश के तहत बहन को फंसाने और आयुष दीपक की मृत्यु का कारण बनने का आरोप लगाया है।
न्याय की मांग
परिजनों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से गुहार लगाई है कि उन्हें न्यायालय से न्याय मिले और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि ऐसे पुलिसकर्मियों को समाज की सेवा में रहने का अधिकार नहीं है।
डिप्टी कमांडेंट आयुष दीपक, जो देश की रक्षा में तैनात थे, के आत्महत्या के इस गंभीर मामले ने पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की नजरें टिक गई हैं।





