मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का छात्राओं से संवाद: इतिहास से प्रेरणा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में छात्राओं को रानी दुर्गावती की शौर्य गाथा सुनाई. उन्होंने कहा हमें गर्व है कि वे मध्यप्रदेश की महारानी थीं. उन्होंने कहा कि 31 मई को उनकी 300वीं जयंती है, पूरा देश उनको याद कर रहा है. इस दिन पीएम मोदी भी भोपाल आ रहे हैं. महारानी दुर्गावती और देवी अहिल्याबाई जैसी शख्सियतों से सीखें…

छात्राओं के साथ सीएम मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत में महिलाएं पहले भी सशक्त थीं, जब उन्हें कम अधिकार थे और आज भी उतनी ही सक्षम हैं जब उन्हें सर्वाधिकार प्राप्त हैं. महारानी दुर्गावती और देवी अहिल्याबाई ने अपने साहस, शौर्य, पराक्रम और कौशल से न केवल शासन किया बल्कि प्रशासन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में एक आदर्श प्रस्तुत किया. इन्होंने कभी हार नहीं मानी. सारी कठिनाइयों से लड़कर अपना मुकाम हासिल किया. आज हम इन्हें उनके पराक्रम के लिए जानते हैं. मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भोपाल के महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्राओं से संवाद कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने इस दौरान छात्राओं को मध्यप्रदेश की महारानी दुर्गावती और लोकमाता देवी अहिल्याबाई के सम्पूर्ण जीवन वृतांत सुनाये. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्राओं के आल्हाद में सहभागी बनकर उनके साथ सेल्फी भी ली.

अकबर की सेना से भी मुकाबला
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महारानी दुर्गावती ने अकबर की सेना के साथ लड़ाई की और खुद को न्यौछावर कर दिया. महारानी दुर्गावती ने जबलपुर में आधारताल, मदन महल बनाया. ऐसी जल संरचनाएं बनवाईं कि एक तालाब भरने के बाद अगला तालाब, उसके बाद उसके अगले तालाब में जल संरक्षण होता रहा. इससे प्रजा को जल संचयन की प्रेरणा मिली.

शासन व्यवस्था की एक नई परिभाषा सिखाई
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्राओं को बताया कि उन्होंने अपने करीब 28 साल के शासन में देश को शासन व्यवस्था की एक नई परिभाषा सिखाई. उन्होंने जगह-जगह मंदिर बनवाए, घाट बनवाए, यात्रियों के लिए सराय, अन्न क्षेत्र, तीर्थ क्षेत्र बनवाए. महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम करते हुए देवी अहिल्याबाई ने विधवा विवाह कराए. उन्होंने सबके साथ समान रूप से न्याय किया. वे एक अच्छी बेटी, अच्छी बहु, अच्छी पत्नी के साथ एक ममतामयी मां भी थीं. मुख्यमंत्री ने कहा कि देवी अहिल्याबाई ने जीवनपर्यंत नारी सशक्तिकरण के लिए काम किया. उन्होंने तत्कालीन महिलाओं को सशक्त बनाते हुए महेश्वरी साड़ी बनाने में कुशल बनाया. इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं. महेश्वरी साड़ियां हमें देवी अहिल्याबाई की सौगात है. अहिल्याबाई ने अपनी सास गोतमाबाई से प्राप्त खासगी की रकम से कई मंदिर और घाट बनवाए. महेश्वर को अपनी राजधानी बनाई. इससे पर्यटन बढ़ता है और पर्यटन व देशाटन से आंतरिक संबंध बनते हैं, इससे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा मिलता है.

31 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आएंगे भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देवी अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 को एक मराठा हिन्दू परिवार में चौंडी नामक गांव में हुआ था, जो आजकल महाराष्ट्र के अहमदनगर में आता है. चूंकि उन्होंने कहा कि 31 मई को स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देवी अहिल्याबाई की स्मृति में आयोजित महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में शामिल होने भोपाल पधार रहे हैं.

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